Gurugram के Sex Ratio में हुआ सुधार, 8 महीने में 54 पॉइंट का उछाल, अवैध गर्भपात के खिलाफ बड़ा एक्शन
गुरुग्राम जिले का लिंगानुपात मार्च 2025 में 827 के निम्नतम स्तर पर था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग की टास्क फोर्स ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।

Gurugram : गुरुग्राम जिले ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत एक बड़ी सफलता हासिल की है। स्वास्थ्य विभाग की टास्क फोर्स द्वारा अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाई गई सख्ती के कारण जिले के लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth – SRB) में मात्र आठ महीनों के भीतर 54 पॉइंट्स का जबरदस्त सुधार दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई राज्य टास्क फोर्स (STF) की साप्ताहिक बैठक में यह प्रगति साझा की गई।
बैठक में दिए गए आँकड़ों के अनुसार, गुरुग्राम जिले का लिंगानुपात मार्च 2025 में 827 के निम्नतम स्तर पर था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग की टास्क फोर्स ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। आठ महीनों की सघन जाँच और छापेमारी के परिणामस्वरूप, अवैध तरीके से गर्भपात किट बेचने वाले केमिस्टों और सप्लायरों के खिलाफ सात से अधिक मामले दर्ज किए गए। कठोर कार्रवाई करते हुए कई केमिस्ट की दुकानों के लाइसेंस भी रद्द किए गए।
इस निर्णायक सख्ती और लगातार जागरूकता अभियानों का नतीजा यह रहा कि अक्टूबर 2025 तक गुरुग्राम का लिंगानुपात 54 पॉइंट्स बढ़कर 881 पर पहुँच गया है।
हालांकि यह सुधार एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन गुरुग्राम अभी भी प्रदेश के औसत लिंगानुपात से पीछे है। राज्य टास्क फोर्स की बैठक में बताया गया कि हरियाणा का समग्र लिंगानुपात (1 जनवरी से 10 नवंबर 2025 तक) 912 दर्ज किया गया है, जो पिछले वर्ष के 904 से बेहतर है। गुरुग्राम का 881 का आँकड़ा अभी भी राज्य औसत से 31 पॉइंट्स कम है।
डॉ. यादव ने ज़िला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस अंतर को पाटने के लिए सख्ती के साथ-साथ जागरूकता कार्यक्रमों को और बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि अवैध गर्भपात करने वालों और इसमें शामिल पाए जाने वाले डॉक्टरों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने सहित दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।
गुरुग्राम सहित सभी ज़िलों को लिंगानुपात में और सुधार लाने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं। डॉ. यादव ने अधिकारियों को एक वर्ष से कम उम्र की सभी अपंजीकृत बच्चियों का पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

इसके अलावा, सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ाने, आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को शामिल करने, और संस्थागत प्रसव तथा समय से पहले प्रसव पंजीकरण को बढ़ावा देने पर भी ज़ोर दिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रत्येक बालिका की सही गणना हो और उसकी देखभाल हो सके।












